Sunday, May 22, 2011

प्रयासो का अभीवादन


सरल है सुन्दर ,या सुन्दर है सरल ?
क्या मैला ठहरा जल बेहतर या विरल ?

कमल को तो ख्याति पूजा थाल में पात्र मिली,
कीचड को कोई श्रेह नहीं , तृष्णा क्यों केवल मात्र मिली ?

क्या जूनून यह क्या पक्षपात, क्यों सिर्फ निष्कर्षों से प्रेम अपार?
संकल्पना , आचरण और निष्पादन से क्यों नहीं है जुड़ता तार ?

श्रम का महत्व क्यों केवल कला के पूर्ण स्वरुप में खोजा जाता है ?
क्यों  नहीं छेंनी की हर चोट , हथोडे के हर प्रहार को तौला जाता है ?

विदित है की परिणाम संघर्सों की परिभाषा है ,
संघर्ष को स्वयं मान मिले क्या इसकी नहीं कोई आशा है ?

अपने कर्मो का मापन क्यों परिणामो पर आधारित हो ,
साक्षात सम्पूर्ण सत्य - "कर्म" , भला क्यों व्यापारिक हों?

प्रलोभन का पोषण यह परिणामो की अंधी धुन करती है ,
इस बेसुध प्रतिद्वन्धता  का फल यह धरती ही बस भरती है .

परिणाम भी निश्चित रूप से शोधन में विशिष्ट महत्व रखते है ,  
केवल परिणामों पे केन्द्रीकरण किन्तु  मूल धेय को विफल करते  है .

एक ऐसी प्रशंशा , एक ऐसे अभिव्वाक्ति  , एक ऐसी जागरूकता का निर्माण करे 
जो हर कदम पे परिणामो और  प्रयासों को एक सूत्र में बाँध एक सृजन शील संवाद करे !!

Thursday, May 19, 2011

अंतर्द्वंध

शब्द जब विमुख हों , अर्थ जब प्रथक हों,


प्रयास जब अथक हों, परिणाम जब विफल हों,

सिहरन भी जब मृदुल हो , सिसकी भी जब प्रबल हो,

भावनाएँ जब मिथक हों, स्वार्थ जब सफल हो,

इन्द्रधनुष भी जब श्याम हो, रौशनी भी जब अन्धकार हो,

विचारों पर जब व्यवहारिकता का पाश हो, जब संरचना में भी नाश हो,

जब साँसों पे भी बंदिश तमाम और सृजन्तामकता पर अंकुश आम हो,

जब अश्रु भी बंजर हों, जब सपने भी सीले हों,

प्रहार भी जब कोमल हों, मलहम  में भी जब कीले हों,

पसीना भी जब क्रत्रिम हो, थकान में भी जब स्फूर्ति हो,

बचपन भी जब चालाक हो, ममता भी बस झूठी मूर्ती हो,

प्यार जब बस एक शब्द हो , ख्वाहिशे भी जब तृप्त हो,

जब नींद में भी आलस हो, जब अधरों पर हमेशा ही एक प्यास हो,

जब शरीर और आत्मा का सम्बन्ध मात्र कार्यात्मक स्वाश हो,

जब लों में भी केवल अँधेरे का ही प्रतीक हो, जब किरने बस अतीत हों,

जब स्वरों का माधुर्य भी चीख हो , जब आश्रय भी भीख हो,


क्या तब अंतर्द्वंध की स्थिति स्वाभाविक नहीं है...??
प्राण को सांसारिक विघनों से बचाता क्या येही अंतर्द्वंध वास्तव में नाविक नहीं है...................??
क्या येही अंतर्द्वंध वास्तव में नाविक नहीं है...................?? शायद हाँ........