Monday, August 27, 2018

कानपुर  वाले  मामा की गोदरेज़ की अलमारी पे ,
चिपके हुए स्टीकर ने बतलाया था मुझको यह पहली बारी
सबको देखा सबको परखा अब है भाजपा की बारी।
गौ रक्षा की आढ़ में जीव हत्या, विकास के नाम पे योगी,हिंदुत्व और राम मंदिर,
लोकतान्त्रिक संस्थानों की नीतिगत लाचारी
मोदीजी - यह कैसा 'सबका साथ,सबका विकास'? यह कैसे हिंदुस्तान की है तैयारी ?

लखनऊ की शामो का मिजाज़ कुछ ऐसा है
की चाय के साथ राजनीती के बिस्किट अक्सर डुबाए जाते है.
चाहे न चाहे हर किसी को भारतीय राजनीती के पाठ
और धर्म से राजनीती का अटूट रिश्ते से वाकिफ़ कराए जाते है.
शिथिल वयवस्था को कोसते सुनते बशर्ते आए है , हम भी उम्र सारी ,
लेकिन मोदीजी - यह कैसा 'सबका साथ,सबका विकास'? यह कैसे हिंदुस्तान की है तैयारी ?

आपको बड़ी उमींदो से हिंदुस्तान ने चुन के भेजा था,
पर शायद हमारी 'हिंदुस्तान ' की परीभाषा ही समान न थी,
आपके लिए जो केवल भगवा था, वह तिरंगे की मेरी लिए पहचान न थी
क्योंकि आपको गद्दी तक लाने में एक वोट मेरा भी था
आपके तथाकथित विकास और स्पष्ट फांसीवाद में अंतर करना है दुविधा भारी
भाई मोदीजी - यह कैसा 'सबका साथ,सबका विकास'? यह कैसे हिंदुस्तान की है तैयारी ?

आपने कहा नोटबंदी करके आप भ्रष्टाचार मिटा डालेंगे,रॉबिनहुड बन के गरीबों के अकाउंट में पैसे डालेंगे,
यकीन जानिये हम संशय के बावजूद आपकी जुमले बाज़ी में बह गए।
आपकी छाती के साइज और आपके 'झोला लेके चल पड़ेंगे' के नारे में
हम भी एटीएम की लाइन्स हस्ते हुए सह गए।
नोटीबंदी तो इकॉनमी को ले डूबी ही , राजनीतिकी फंडिंग पे आपके यू -टर्न ने विदित कर दी है सच्चाई सारी
भ्रस्टाचार विरोधी  मोदीजी - यह कैसा 'सबका साथ,सबका विकास'? यह कैसे हिंदुस्तान की है तैयारी ?

आपने काश्मीर में बच्चों के चेहरे पेलेट गन्स से गुदवा दिए,
कश्मीरी को केवल इंडियन आर्मी  पर पत्थर फैकने बाले बना दिए,
घाटी में रिकॉर्ड सिविलियन और आर्मी पर्सनल की मृत्यु का क्या हुआ मक़सद
न आतंकवाद कम हुआ, न कश्मीरी के दिल में हिंदुस्तान के लिए नफ़रत
ज&क सरकार गठन से राजनीतिकी अवसरवादी जरूर हुई प्रत्यक्ष और देशहित के आगे आपकी राजनीतिक मक्कारी
समस्या निवारक- मोदीजी - यह कैसा 'सबका साथ,सबका विकास'? यह कैसे हिंदुस्तान की है तैयारी ?

अख़लाक़ जला, पहलु मरा , लिंचिंग की खबर हर जगह अंकित थी
लेकिन आपका मौन न टूटा,  गऊ माता तो आखिरकार सुरक्षित थी
गौ-मूत्र और गोबर के आगे इंसानी जीवन वह भी मुसलमान के जीवन का प्रश्न ही कहाँ
भले ही भारत उसी गौ -माता के मीट का अग्रणी निर्यातक हो,पर यह तो प्र्शन ही नहीं वहां
राजनीतिक रोटियों के सेकने के लिए गोबर तो कोई भी चलता है, उसमे बहुत नहीं परेशानी
धर्म निष्पक्ष मोदीजी - यह कैसा 'सबका साथ,सबका विकास'? यह कैसे हिंदुस्तान की है तैयारी ?

पहले गौरी को मारा, और फिर भौमिक , निश्छल बुख़ारी सब नाम इसमें जुड़ गए.
पर आप केवल तब ही बोले , केवल वही बोले , वैसे ही बोले - जो वोट की लिए जरूरी था.