मैं उन्हें सिखाना चाहता हूँ , मैं उन्हें पढ़ना चाहता हूँ ,
क्या मैं उनको खुद के जैसा बनाना चाहता हूँ?
केवल इसलिए की मैं, शिक्षा पद्वति से असंतुस्ट हूँ -
एक नए नाम से उसी पद्वति की एक नयी छवि बनाना चाहता हूँ ?
क्या है जीवन , क्या लक्ष्य , kya है आखिर उसका मर्म ?
इन कठिन सवालों के सरल जवाब , क्या उनको रटाना चाहता हूँ ?
केवल इसलिए की मैं, शिक्षा पद्वति से असंतुस्ट हूँ -
एक नए नाम से उसी पद्वति की एक नयी छवि बनाना चाहता हूँ ?
क्या अपने संघर्षो , अपने निर्णयों को जीवन का केंद्र बना , उनको सही ठहरना चाहता हूँ ?
क्या मैं अपने आदर्शो को अविवाद्य सिद्धांत बना कर अपनी शाला में दर्शाना चाहता हूँ ?
केवल इसलिए की मैं, शिक्षा पद्वति से असंतुस्ट हूँ -
एक नए नाम से उसी पद्वति की एक नयी छवि बनाना चाहता हूँ ?
असंभव है अंतर शायद अपनी पहचान से कर पाना अपने आप को।
बहुत कठिन है अंतर करना शायद अपनी प्रतिबद्धताओं का अपने काम को
शायद इस बोध की स्वीकृति ही सबसे जरूरी काम है
इस मोड़ पे फिलहाल मेरे लिए एहि सबसे महत्वपीर्ण आयाम है
क्या मैं उनको खुद के जैसा बनाना चाहता हूँ?
केवल इसलिए की मैं, शिक्षा पद्वति से असंतुस्ट हूँ -
एक नए नाम से उसी पद्वति की एक नयी छवि बनाना चाहता हूँ ?
क्या है जीवन , क्या लक्ष्य , kya है आखिर उसका मर्म ?
इन कठिन सवालों के सरल जवाब , क्या उनको रटाना चाहता हूँ ?
केवल इसलिए की मैं, शिक्षा पद्वति से असंतुस्ट हूँ -
एक नए नाम से उसी पद्वति की एक नयी छवि बनाना चाहता हूँ ?
क्या अपने संघर्षो , अपने निर्णयों को जीवन का केंद्र बना , उनको सही ठहरना चाहता हूँ ?
क्या मैं अपने आदर्शो को अविवाद्य सिद्धांत बना कर अपनी शाला में दर्शाना चाहता हूँ ?
केवल इसलिए की मैं, शिक्षा पद्वति से असंतुस्ट हूँ -
एक नए नाम से उसी पद्वति की एक नयी छवि बनाना चाहता हूँ ?
असंभव है अंतर शायद अपनी पहचान से कर पाना अपने आप को।
बहुत कठिन है अंतर करना शायद अपनी प्रतिबद्धताओं का अपने काम को
शायद इस बोध की स्वीकृति ही सबसे जरूरी काम है
इस मोड़ पे फिलहाल मेरे लिए एहि सबसे महत्वपीर्ण आयाम है