Monday, January 16, 2012

सपनो की उड़ान


उड़ान मेरे सपनो की , संसाधनों की परिधि लांघ गई
विजयश्री की कल्पना , बिखरी आकांक्षाओ को बाँध गई

कदमो पर अब किन्तु -परन्तु का जोर नहीं , विकल्पों पर अब कोई शोध नहीं 
सपनो में सतरंगी -अतरंगी  रंग बिखरे, तस्वीर पूर्ण होने में अब अवरोध नहीं.

अपने विचारो की इस विचलता पर अब मेरा आधिपत्य है
शंकाओ को धूमिल करते , मेरे सपने ही मेरा सत्य है
 
विद्रोह के स्वर हों  मुखर , होते रहे , प्रलोभनों की अब सम्भावना नहीं,
जो निश्चय किया है मन ने , निश्चित उसकी सदभावना वही .
 
मेरे निश्चय , मेरे कर्म , मेरी ही होगी जवाबदेहि पूर्ण,
पोषित करूँगा , रोपित करूँगा , प्रगति का यह कोमल भ्रूण.
 
अभी तो हर्षित हुआ ह्रदय है , उपलब्धि के सपनो से,
मुझको न व्यर्थ  समझे - समझाये , कह दो सभी हितैषी अपनों से.
 
उज्वल अभिषेक माथे पे , शोभित होते चन्दन , रोली और अक्षत
प्रज्वलित आकांक्षाएं ह्रदय में , लक्षित होते सागर  , गगन और पर्वत.