दिल कर आया इस मनचली स्याही का , चखे ये इस संजीदे पन्ने का स्वाद,
जो कभी होता नित्य था वोही बन गया है इस आपाधापी में अपवाद,
आज फिर कई दिनों के बाद...
आज फिर कई दिनों के बाद ....
मैंने खोले पट सपनो से सुसज्जित कुछ नयी उम्मीदों के,
मन के अंकुर ने दिया जन्म , फिर जीवंत हुई एक नयी शुरुआत,
आज फिर कई दिनों के बाद......
आज फर कई दिनों के बाद....
रंगों में उँगलियाँ डुबोने को मन कर आया है,
अचानक ही होकर बेसुध , बेफिक्र और बेबाक,
आज फिर कई दिनों के बाद......
आज फिर कई दिनों के बाद....
इस अलसाई कलम को ठीक करते लग गए है उँगलियों पर स्याही के कई निशान,
वहीँ जहाँ और लगे है एक दूसरी लिखावट के दाग , मिटाएंगे मेरे मन का अज्ञान,
आज फिर कई दिनों के बाद....
आज फिर कई दिनों के बाद ,
देख झलक अतुलित भारत की, पुलकित ह्रदय में उत्त्पन्न हुआ उन्माद,
नेत्रों से जो दृश्य दिखे आत्मा तक सींचित कर गए भारतीय होने का एहसास,
आज फिर कई दिनों के बाद !!
आज फिर कई दिनों के बाद,
आज फिर कई दिनों के बाद.......
nice yaar :) tum kaafi accha likh lete ho...
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