" वो ऐसे हैं , वह वैसे हैं, और वह तो उनके ही जैसे है . .
और उनकी तो बस बात न पूछो , वह तो न जाने कैसे कैसे हैं।।
उन्हें ऐसा करना चाहिए , उन्हें वैसा नहीं करना चाहिए,
उन्होंने ऐसा किया पर उन्होंने तो वो कर दिया . . भला बताइए !!
वो तो ऐसी नहीं थी , जरूर उसमे ही कोई कमी थी ...
वो तो दिखती थी अक्सर उसके साथ, होगी जरूर कई बात !!
संस्कार भी तो कोई चीज़ है , यह पाश्चात्य संस्कृति भी अजीब है ,
अब हम तो कुछ कहते नहीं, अपना अपना नसीब है।
वो सब तो पागल है, ऐसे थोड़ी कुछ बदलाव आता है।
भाईसाहब , बिना मतलब के लाठी खाने कोई नहीं जाता है।
अजी साहब यह देश तो अब है गर्त में , सब साले चोर है .
आपको संघर्ष करना चाहिए , प्रयास ही सफलता की डोर है। "
.................. कौन मै ??
मै क्या करता हूँ ? मैंने क्या किया ?
मैंने क्या संजोया ? मैंने क्या दिया ?
अरे यह सब भला मै क्यों सोचूँ ....
चलिए चलिए बाजू हटिये
जिसको देखो आ जाता है कहने ....
आप ऐसे हैं , आप वैसे हैं, और आप तो उनके ही जैसे है . ...
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