Tuesday, January 1, 2013

एक वार्ता




"     वो ऐसे हैं  , वह वैसे हैं, और वह तो उनके ही जैसे है . .
      और उनकी  तो बस बात न पूछो , वह तो न जाने कैसे कैसे हैं।।

उन्हें ऐसा करना चाहिए , उन्हें वैसा नहीं करना चाहिए,
उन्होंने ऐसा किया पर उन्होंने तो वो कर दिया . . भला बताइए !!

       वो तो ऐसी नहीं थी , जरूर उसमे ही कोई कमी थी ... 
       वो तो दिखती थी अक्सर उसके साथ,  होगी जरूर कई बात !!

संस्कार भी तो कोई चीज़ है , यह पाश्चात्य संस्कृति भी अजीब है ,
अब हम तो कुछ कहते नहीं, अपना अपना नसीब है।

       वो सब तो पागल है, ऐसे थोड़ी कुछ बदलाव आता है।
       भाईसाहब , बिना मतलब के लाठी खाने कोई नहीं जाता है।

अजी साहब यह देश तो अब है गर्त में , सब साले चोर है .
आपको  संघर्ष करना चाहिए , प्रयास  ही सफलता की डोर है।   "


                                                                                                
.................. कौन मै ??

मै क्या करता हूँ ?  मैंने क्या किया ?
मैंने क्या  संजोया ?  मैंने क्या दिया ?

अरे यह सब भला मै क्यों सोचूँ ....
चलिए चलिए  बाजू हटिये

जिसको देखो आ जाता है कहने ....


आप  ऐसे हैं  , आप  वैसे हैं, और आप  तो उनके ही जैसे है . ...










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